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बलराम जयंती 2025
बलराम जयंती 2025
Posted on 13 August 2025 | by Astro Star Talk
बलराम जयंती: भगवान बलराम के जन्मोत्सव का महत्व, कथा, श्लोक और पूजा विधि
बलराम जयंती हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान विष्णु के शेषनाग अवतार और भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे हलषष्ठी या ललही छठ भी कहते हैं।
साल 2025 में बलराम जयंती 14 अगस्त (गुरुवार) को मनाई जाएगी। षष्ठी तिथि सुबह 4:23 बजे से शुरू होकर अगले दिन 2:07 बजे तक रहेगी।
भगवान बलराम का परिचय और महत्व
भगवान बलराम को बलदेव, बलभद्र और हलायुध के नामों से भी जाना जाता है। वे शक्ति, साहस, सरलता और कृषि समृद्धि के प्रतीक हैं। उनका मुख्य शस्त्र हल है, जो कृषि और धरती की उर्वरता का प्रतीक है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, उनका जन्म माता देवकी के गर्भ में हुआ, लेकिन कंस से सुरक्षा के लिए योगमाया द्वारा उन्हें रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया। इस कारण उनका एक नाम संकर्षण भी पड़ा।
बलराम जी का पूजन करने से भक्तों को बल, आत्मविश्वास, धार्मिक कर्तव्यपालन की प्रेरणा और कृषि में सफलता मिलती है। यह पर्व संतान सुख, संतान की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान बलराम श्रीकृष्ण के मार्गदर्शक और मित्र थे। वे धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए सदैव तत्पर रहते थे।
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध में वे तटस्थ रहे और दोनों पक्षों को शिक्षण दिया। उनकी छवि एक ओर महान योद्धा की है, तो दूसरी ओर एक दयालु और सरल धर्मगुरु की भी है।
इस दिन की पूजा से—
- जीवन में साहस और शक्ति आती है
- मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास बढ़ता है
- कृषि और व्यवसाय में उन्नति होती है
- संतान सुख और परिवार की खुशहाली प्राप्त होती है
बलराम जयंती की वैदिक कथाएँ
- जन्म कथा – शेषनाग अवतार बलराम का संकर्षण (गर्भ स्थानांतरण) कर उन्हें देवकी से रोहिणी के गर्भ में रखा गया और वे गोकुल में पले-बढ़े।
- हलधारी और कृषि देवता – हल और मूसल उनके प्रमुख अस्त्र हैं, जिससे वे किसानों के रक्षक और कृषि के देवता माने जाते हैं।
- युद्ध और धर्म रक्षा – कई युद्धों में उन्होंने अधर्म का नाश किया, परंतु महाभारत युद्ध में वे तटस्थ रहे।
- रेवती विवाह कथा – उन्होंने रेवती से विवाह किया और अपने हल से उनकी लंबाई घटाकर उन्हें अपने अनुरूप बनाया।
- शेषनाग स्वरूप – वे शेषनाग के रूप में भगवान विष्णु की सेवा करते हैं और द्वापर युग में बड़े भाई के रूप में अवतरित हुए।
भगवान बलराम के प्रमुख संस्कृत श्लोक
प्रणाम मंत्र
नमस्ते हलधृग्राम नमस्ते मुशलायुध ।
नमस्ते रेवतीकान्त नमस्ते भक्तवत्सल ॥
अर्थ: हल और मूसल धारण करने वाले, रेवती के पति और भक्तों के रक्षक भगवान बलराम को मेरा प्रणाम।
सहस्रनाम स्तोत्र से श्लोक
ॐ बलभद्रो राम भद्रो रामः शङ्करः 'च्युतः।
रेवती रमणो देवः कामपालो हलायुधः॥
अर्थ: हे बलभद्र, हे राम, हे भद्र, हे शंकर, हे रेवती के पति, हे हल और मूसल धारी देव!
शुभ मुहूर्त (2025)
- ब्रह्म मुहूर्त – 04:23 AM से 05:07 AM
- अभिजीत मुहूर्त – 11:59 AM से 12:52 PM
- विजय मुहूर्त – 02:37 PM से 03:30 PM
- गोधूलि मुहूर्त – 07:01 PM से 07:23 PM
बलराम जयंती पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान – ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और महुआ की दातून करें।
- पूजा स्थल की तैयारी – गंगाजल से शुद्धिकरण कर स्वच्छ कपड़ा बिछाएं।
- मूर्ति स्थापना – भगवान बलराम और श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- पूजा सामग्री – चंदन, अक्षत, फूल, दूर्वा, तुलसी, फल, मिठाई, महुआ, भैंस के दूध से बना दही और घी, हल का प्रतीकात्मक रूप।
- भोग अर्पण – हल से उगे अन्न का उपयोग न करें। दही और घी भैंस के दूध से बनाएं।
- विशेष अर्पण – हल, गदा, फूल और तुलसी भगवान बलराम को अर्पित करें।
- मंत्र जाप – “ॐ बलरामाय नमः” मंत्र का जाप करें और बलराम कथा सुनें।
- आरती और व्रत – आरती करें, कथा पूरी करें और संतान सुख व परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखें।
क्षेत्रीय रूप
- उत्तर भारत – हलषष्ठी या ललही छठ
- ब्रज क्षेत्र – बलदेव छठ
- गुजरात – रंधन छठ
इन स्थानों पर भजन-कीर्तन, कथा वाचन और प्रसाद वितरण का विशेष आयोजन होता है।
एस्ट्रो स्टार टॉक के विचार
बलराम जयंती केवल एक जन्मोत्सव नहीं है, बल्कि यह शक्ति, धर्म, कृषि समृद्धि और संतान की रक्षा का प्रतीक है। इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भौतिक और आध्यात्मिक दोनों लाभ प्राप्त होते हैं।
जय बलराम! जय कृष्ण!