Book your private session

Get genuine guidance from
Pandit Basant Vyas Ji

Book Now

BLOG

माँ कालरात्रि 🩶 नवरात्रि दिन 7: पूजा विधि, कथा, मंत्र और भोग | AstroStarTalk

Blog Image

माँ कालरात्रि 🩶 नवरात्रि दिन 7: पूजा विधि, कथा, मंत्र और भोग | AstroStarTalk

Posted on 16 October 2026 | by Astro Star Talk

नवरात्रि दिन 7 🩶: माँ कालरात्रि की पूजा विधि, कथा, मंत्र और भोग | AstroStarTalk

 

By AstroStarTalk | प्रकाशित: 17 अक्टूबर 2026 | विषय: नवरात्रि, माँ कालरात्रि, पूजा विधि

 

AstroStarTalk की ओर से: शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन की सरल और पूरी गाइड। 🔱

 

नाम सुनकर कई लोग थोड़ा सहम जाते हैं। "कालरात्रि" यानी काली रात। पर माँ दुर्गा का ये रूप डराने के लिए नहीं, डर को दूर करने के लिए माना गया है। इसीलिए परंपरा में उन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है, यानी सदा शुभ करने वाली।

 

आज नवरात्रि का सातवाँ दिन माँ कालरात्रि को समर्पित है। AstroStarTalk के इस लेख में हम उनका परिचय, कथा, पूजा विधि, मंत्र, भोग और कुछ ज़रूरी बातें आसान भाषा में जानेंगे। 🙏

 

📅 शारदीय नवरात्रि 2026 का सातवाँ दिन

 

तारीख़: 17 अक्टूबर 2026, शनिवार

तिथि: आश्विन शुक्ल सप्तमी

देवी: माँ कालरात्रि

आज का प्रचलित रंग: स्लेटी (ग्रे) 🩶

भोग: गुड़

 

⚠️ तिथि को लेकर ज़रूरी बात: इस साल सप्तमी तिथि 17 और 18 अक्टूबर, दोनों दिन सूर्योदय के समय मौजूद बताई जा रही है। इसीलिए दिन गिनने वाले कैलेंडर में माँ कालरात्रि की पूजा 17 अक्टूबर को है, जबकि बंगाल के दुर्गा पूजा कैलेंडर जैसे कुछ पंचांग महा सप्तमी 18 अक्टूबर को मानते हैं। अष्टमी और नवमी की तारीख़ भी अलग-अलग पंचांगों में थोड़ी भिन्न मिलती है।

 

इसलिए अपने परिवार या मंदिर के पंचांग के अनुसार चलिए, और कन्या पूजन व हवन का दिन तय करने से पहले अपने शहर का पंचांग या पंडित जी की सलाह ज़रूर ले लें।

 

🌑 माँ कालरात्रि कौन हैं

 

माँ कालरात्रि नवदुर्गा का सातवाँ रूप हैं। मान्यता है कि वे अंधकार, भय और नकारात्मकता का नाश करती हैं। उनका रूप देखने में उग्र है, पर भक्तों के लिए वे अत्यंत कल्याणकारी मानी जाती हैं।

 

उनका स्वरूप (परंपरा के अनुसार):

 

गहरा काला रंग और खुले, बिखरे हुए केश

तीन नेत्र, जो ब्रह्मांड की तरह गोल और तेजस्वी बताए जाते हैं

गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला

चार भुजाएँ: ऊपर का दायाँ हाथ अभय मुद्रा में और नीचे का दायाँ हाथ वर मुद्रा में

बाएँ हाथों में लोहे का काँटा और खड्ग (तलवार)

वाहन गधा (गर्दभ)

 

एक भाव ये भी है कि जिस हाथ से वे अभय देती हैं, वही उनके शुभंकरी रूप की पहचान है। यानी बाहर से उग्र दिखने वाली देवी के भीतर माँ जैसी करुणा है।

 

📖 माँ कालरात्रि की कथा

 

पौराणिक कथा के अनुसार शुंभ और निशुंभ नाम के दो शक्तिशाली असुरों ने तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। उनकी सेना में रक्तबीज नाम का एक असुर भी था, जिसे वरदान था कि उसके रक्त की जो भी बूँद ज़मीन पर गिरेगी, उससे एक नया रक्तबीज पैदा हो जाएगा।

 

जब देवी दुर्गा ने उससे युद्ध किया, तो हर वार के साथ रक्तबीज की संख्या बढ़ती गई और युद्ध मुश्किल हो गया। तब देवी ने अपने तेज से कालरात्रि के रूप को प्रकट किया। कथा के अनुसार माँ कालरात्रि ने रक्तबीज के रक्त को ज़मीन पर गिरने से पहले ही रोक लिया, जिससे नए असुर पैदा नहीं हो पाए, और इस तरह रक्तबीज का अंत हुआ।

 

अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में कथा के विवरण थोड़े भिन्न मिलते हैं, पर अंधकार और भय पर विजय का मूल भाव सब जगह एक ही है।

 

💡 इस कथा से क्या सीख मिलती है

 

डर का सामना: जिस चीज़ से हम डरते हैं, उसका सामना करने पर वो छोटी लगने लगती है

समस्या की जड़ पकड़ें: रक्तबीज की तरह कई परेशानियाँ बार-बार इसलिए लौटती हैं कि हम उनकी जड़ नहीं रोकते

बाहरी रूप से राय न बनाएँ: उग्र दिखने वाला रूप भी शुभ और करुणामय हो सकता है

हर अंधेरी रात के बाद सुबह है: कठिन समय हमेशा नहीं रहता

 

इसीलिए जो लोग किसी भय, बेचैनी या नकारात्मक विचारों से जूझ रहे हैं, उनके लिए आज का दिन ख़ास माना जाता है। 🌙

 

🪔 माँ कालरात्रि की पूजा विधि

 

ये एक सामान्य विधि है। हर परिवार की परंपरा अलग हो सकती है।

 

1. स्नान और शुद्धि 🚿

सुबह जल्दी स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें। आज स्लेटी या सादे रंग के वस्त्र पहनना प्रचलित है।

 

2. कलश और ज्योति की देखभाल 🏺

कलश और अखंड ज्योति (अगर जलाई है) की सफ़ाई और देखभाल करें। जौ में हल्का जल डालें और कलश के पास दीपक जलाएँ।

 

3. संकल्प और गणेश स्मरण 🙏

सबसे पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर आज की पूजा का संकल्प लें।

 

4. माँ का आवाहन 🌺

माँ कालरात्रि का ध्यान करें और उन्हें रोली, चंदन, अक्षत और लाल फूल (ख़ासकर गुड़हल) अर्पित करें। परंपरा में रात की रानी जैसे गहरे रंग या सुगंध वाले फूल भी चढ़ाए जाते हैं।

 

5. भोग 🍯

परंपरा में माँ कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है। इसे अर्पित करके प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है।

 

6. मंत्र जाप 📿

नीचे दिए मंत्र शांत मन से 11, 21 या 108 बार जपें।

 

7. आरती और प्रसाद 🔔

अंत में माँ की आरती करें और प्रसाद सबमें बाँटें।

 

📿 माँ कालरात्रि के मंत्र

 

मंत्र:

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः

 

ध्यान मंत्र:

करालवदना घोरा मुक्तकेशी चतुर्भुजा।

कालरात्रिः करालिका दिव्या विद्युत्मालाविभूषिता॥

 

प्रार्थना मंत्र:

या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 

अगर उच्चारण को लेकर संदेह हो, तो किसी जानकार या पंडित जी से एक बार सुन लें। पर श्रद्धा से "ॐ देवी कालरात्र्यै नमः" जपना भी पूरा माना जाता है। 🙏

 

🩶 आज का रंग, फूल और भोग

 

रंग: स्लेटी (ग्रे), जो गंभीरता, संयम और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है

फूल: लाल गुड़हल और अन्य गहरे या सुगंधित फूल

भोग: गुड़ या गुड़ की मिठाई

 

एक प्रचलित मान्यता है कि गुड़ का भोग लगाकर उसे परिवार और ज़रूरतमंदों में बाँटने से घर में सुख-शांति की कामना की जाती है। ये श्रद्धा की बात है, कोई निश्चित नियम नहीं। रंग पहनना भी आधुनिक परंपरा है, कोई शास्त्रीय नियम नहीं, इसलिए इसे अपनी सुविधा से अपनाइए। 🎨

 

🕉️ शनिवार का संयोग

 

इस साल नवरात्रि का सातवाँ दिन शनिवार को पड़ा है, जो परंपरा में शनि देव का दिन माना जाता है। कई लोग इस संयोग में आज साहस, अनुशासन और भय से मुक्ति की प्रार्थना को ख़ास मानते हैं। ये अपनी श्रद्धा और परिवार की परंपरा पर निर्भर है।

 

✅ आज क्या करें

 

सुबह जल्दी उठकर पूजा करें और घर को साफ़ रखें

कलश और जौ की देखभाल करें

गुड़ का भोग लगाएँ और प्रसाद बाँटें

शाम को दीपक जलाएँ और कुछ देर शांत बैठकर मंत्र जपें

व्रत रखें तो सात्विक भोजन लें

ज़रूरतमंद को भोजन, कपड़े या गुड़ दान करें

मन में कोई डर हो तो उसे काग़ज़ पर लिखकर बड़ों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें

 

❌ आज क्या न करें

 

क्रोध, कड़वे बोल और झगड़े से बचें

तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें

पूजा के दौरान मोबाइल और शोर से बचें

कलश या जौ वाले पात्र को बार-बार न हिलाएँ

माँ के उग्र रूप से डरें नहीं और दूसरों को डराने वाली बातें न फैलाएँ

व्रत का भोजन झूठा या बर्बाद न करें

 

ये बातें परंपरा पर आधारित हैं और परिवारों में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।

 

🔮 ज्योतिष की दृष्टि से माँ कालरात्रि

 

कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में नवदुर्गा के हर रूप को किसी ग्रह से जोड़ा जाता है। प्रचलित मान्यता में माँ कालरात्रि को शनि ग्रह से जोड़ा जाता है, जो अनुशासन, कर्म और धैर्य का कारक है। कुछ परंपराओं में उन्हें राहु से भी जोड़ा जाता है। कुछ योग परंपराओं में उनका संबंध सहस्रार चक्र से बताया जाता है। ये मान्यताएँ अलग-अलग परंपराओं में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।

 

AstroStarTalk की सलाह यही है कि शनि या राहु के नाम पर डरिए नहीं। साढ़ेसाती या दोष जैसे शब्दों से घबराकर महँगे उपायों के चक्कर में न पड़िए। अपनी कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी को दिखाइए और सरल, ईमानदार उपाय अपनाइए। नियम और श्रद्धा से की गई पूजा ही सबसे बड़ा उपाय है। 🌿

 

📖 हमारा पिछला लेख पढ़ें

 

अगर आपने हमारा पिछला लेख नहीं पढ़ा है, तो यहाँ पढ़ सकते हैं:

 

👉 नवरात्रि दिन 4 💙: माँ कूष्मांडा की पूजा विधि, कथा, मंत्र और भोग | AstroStarTalk

 

सीधा लिंक: https://astrostartalk.com/blogdetails.php?id=113

 

साथ ही AstroStarTalk पर घटस्थापना की विधि, नवरात्रि पूजा सामग्री की लिस्ट और माँ दुर्गा-महिषासुर की कथा भी देख सकते हैं।

 

❓ कुछ आम सवाल

 

नवरात्रि का सातवाँ दिन कब है?

शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को। कुछ पंचांग सप्तमी को 18 अक्टूबर तक भी गिनते हैं, इसलिए अपने कैलेंडर से पुष्टि कर लें।

 

माँ कालरात्रि का भोग क्या है?

परंपरा में गुड़ या गुड़ की मिठाई चढ़ाई जाती है।

 

आज का रंग कौन सा है?

स्लेटी (ग्रे)। पर रंग की परंपरा सबके लिए अनिवार्य नहीं है, अपनी सुविधा से अपनाएँ।

 

क्या माँ कालरात्रि की पूजा से डरना चाहिए?

नहीं। परंपरा में उन्हें शुभंकरी कहा गया है, यानी शुभ करने वाली, और उनका रूप भय दूर करने वाला माना गया है।

 

क्या सातवें दिन उपवास ज़रूरी है?

नहीं। अपनी सेहत और परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय लें। डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था में कठोर व्रत न रखें और डॉक्टर की सलाह लें। डायबिटीज़ वाले लोग गुड़ के प्रसाद की मात्रा का ध्यान रखें।

 

क्या बिना पंडित जी के पूजा हो सकती है?

हाँ, कई परिवार खुद श्रद्धा से पूजा करते हैं। विधि में संदेह हो तो बड़ों या पंडित जी से पूछ लें।

 

🌺 अंत में

 

माँ कालरात्रि हमें सिखाती हैं कि अंधेरे से घबराने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि उसी अंधेरे में माँ का अभय हाथ भी होता है। जब भी मन किसी बात से डरे, तो उनके अभय मुद्रा वाले हाथ को याद कीजिए। आज की पूजा इसी भाव से कीजिए, और अपने भीतर के डर को एक कदम पीछे छोड़ दीजिए। 🙏

 

AstroStarTalk की ओर से आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ कालरात्रि आपके घर से भय और नकारात्मकता दूर करें और सुख, शांति और साहस दें। ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए, और ज्योतिष से जुड़े सवाल हों तो AstroStarTalk पर हमसे ज़रूर पूछिए। 💫

 

आपको किस बात से सबसे ज़्यादा हिम्मत मिलती है? कमेंट में हमारे साथ ज़रूर बाँटिए। 🩶

 

नोट: तिथि, मुहूर्त और विधि क्षेत्र व परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं। अंतिम निर्णय से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित जी से सलाह लें। सर्वाधिकार सुरक्षित, AstroStarTalk।