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माँ कात्यायनी 💚: नवरात्रि दिन 6 पूजा विधि, कथा, मंत्र | AstroStarTalk
माँ कात्यायनी 💚: नवरात्रि दिन 6 पूजा विधि, कथा, मंत्र | AstroStarTalk
Posted on 15 October 2026 | by Astro Star Talk
रात्रि दिन 6 💚: माँ कात्यायनी की पूजा विधि, कथा, मंत्र और भोग | AstroStarTalk By AstroStarTalk | प्रकाशित: 16 अक्टूबर 2026 | विषय: नवरात्रि, माँ कात्यायनी, पूजा विधि AstroStarTalk की ओर से: शारदीय नवरात्रि के छठे दिन की सरल और पूरी गाइड। 🗡️ कुछ लोग शांत दिखते हैं, पर जब बात अपनों की रक्षा की आती है, तो उनमें गज़ब की हिम्मत आ जाती है। नवरात्रि का छठा दिन माँ दुर्गा के उसी रूप को समर्पित है, जो करुणा भी हैं और अन्याय के विरुद्ध खड़ी होने वाली शक्ति भी। आज नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी को समर्पित है। AstroStarTalk के इस लेख में हम उनका परिचय, कथा, पूजा विधि, मंत्र, भोग और कुछ ज़रूरी बातें आसान भाषा में जानेंगे। 🙏 📅 शारदीय नवरात्रि 2026 का छठा दिन तारीख़: 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार तिथि: आश्विन शुक्ल षष्ठी देवी: माँ कात्यायनी आज का प्रचलित रंग: हरा 💚 भोग: शहद दिल्ली के संदर्भ में षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर की सुबह लगभग 3:26 बजे शुरू होकर 17 अक्टूबर की सुबह लगभग 5:55 बजे तक रहती है, यानी पूरा आज का दिन इसमें आता है। तिथि और मुहूर्त का समय हर शहर में थोड़ा अलग होता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी की सलाह ले लें। पूर्वी भारत में षष्ठी से दुर्गा पूजा के उत्सव की शुरुआत मानी जाती है, जिसमें बिल्व निमंत्रण और कल्पारंभ जैसी रस्में होती हैं। आपके क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इसमें अंतर हो सकता है। 🗡️ माँ कात्यायनी कौन हैं माँ कात्यायनी का नाम कात्यायन ऋषि से जुड़ा है। कथा के अनुसार देवी ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसीलिए वे कात्यायनी कहलाईं। उन्हें महिषासुरमर्दिनी यानी महिषासुर का वध करने वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है। उनका स्वरूप: स्वर्ण जैसा चमकता, तेजस्वी रूप चार भुजाएँ: एक हाथ में तलवार, दूसरे में कमल का फूल एक हाथ अभय मुद्रा में और एक वर मुद्रा में वाहन सिंह (शेर) चेहरे पर तेज और आँखों में दृढ़ता माँ का ये रूप साहस, धर्म की रक्षा और बुराई के अंत का प्रतीक माना जाता है। 📖 माँ कात्यायनी की कथा पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर नाम का असुर तीनों लोकों में आतंक मचा रहा था। देवता उससे हार चुके थे और अपना राज्य खो चुके थे। तब देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। इसी समय कात्यायन ऋषि ने देवी की कठोर तपस्या की और उनसे प्रार्थना की कि वे उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें। माना जाता है कि देवी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और उनके आश्रम में प्रकट हुईं। कात्यायन ऋषि ने सबसे पहले उनकी पूजा की, इसलिए वे कात्यायनी कहलाईं। कथा में कहा जाता है कि ऋषि ने आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी, अष्टमी और नवमी को उनकी पूजा की, और दशमी के दिन देवी ने महिषासुर का वध किया। इसी कारण दशमी को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। एक और प्रचलित मान्यता है कि ब्रज की गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने की कामना से यमुना किनारे माँ कात्यायनी की पूजा की थी। इसी वजह से विवाह की कामना रखने वाली कन्याएँ आज के दिन ख़ास तौर पर उनकी आराधना करती हैं। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में कथा के विवरण थोड़े भिन्न मिलते हैं, पर साहस और धर्म की रक्षा का मूल भाव सब जगह एक ही है। 💡 इस कथा से क्या सीख मिलती है अन्याय के सामने डटना: शांत रहना कमज़ोरी नहीं, पर ज़रूरत पड़ने पर आवाज़ उठाना भी ज़रूरी है एकजुटता की ताक़त: देवताओं के तेज के मिलने से ही शक्ति प्रकट हुई सच्ची प्रार्थना का महत्व: ऋषि की तपस्या से देवी का जन्म हुआ बुराई का अंत निश्चित है: चाहे वो कितनी भी बड़ी हो इसीलिए जो लोग जीवन में साहस, सुरक्षा या सही जीवनसाथी की कामना करते हैं, उनके लिए आज का दिन ख़ास माना जाता है। 💚 🪔 माँ कात्यायनी की पूजा विधि ये एक सामान्य विधि है। हर परिवार की परंपरा अलग हो सकती है। 1. स्नान और शुद्धि 🚿 सुबह जल्दी स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें। आज हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। 2. कलश और ज्योति की देखभाल 🏺 कलश और अखंड ज्योति (अगर जलाई है) की सफ़ाई और देखभाल करें। जौ में हल्का जल डालें और कलश के पास दीपक जलाएँ। 3. संकल्प और गणेश स्मरण 🙏 सबसे पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर आज की पूजा का संकल्प लें। 4. माँ का आवाहन 🌼 माँ कात्यायनी का ध्यान करें और उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, गेंदे या पीले फूल और माला अर्पित करें। हरे पत्ते और ताज़े फूल भी चढ़ाए जा सकते हैं। 5. भोग 🍯 परंपरा में माँ कात्यायनी को शहद का भोग लगाया जाता है। इसे छोटी साफ़ कटोरी में अर्पित करके प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है। 6. मंत्र जाप 📿 नीचे दिए मंत्र शांत मन से 11, 21 या 108 बार जपें। 7. आरती और प्रसाद 🔔 अंत में माँ की आरती करें और प्रसाद सबमें बाँटें। 📿 माँ कात्यायनी के मंत्र मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः ध्यान मंत्र: चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥ प्रार्थना मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ अगर उच्चारण को लेकर संदेह हो, तो किसी जानकार या पंडित जी से एक बार सुन लें। पर श्रद्धा से "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः" जपना भी पूरा माना जाता है। 🙏 💚 आज का रंग, फूल और भोग रंग: हरा, जो विकास, नई शुरुआत और संतुलन का प्रतीक माना जाता है फूल: गेंदा और अन्य ताज़े फूल, हरे पत्तों के साथ भोग: शहद और मौसमी फल एक प्रचलित मान्यता है कि शहद का भोग लगाकर उसे परिवार में बाँटने से घर में मिठास, सुख और शांति की कामना की जाती है। ये श्रद्धा की बात है, कोई निश्चित नियम नहीं। रंग पहनना भी आधुनिक परंपरा है, कोई शास्त्रीय नियम नहीं, इसलिए इसे अपनी सुविधा से अपनाइए। 🎨 🕉️ शुक्रवार का संयोग इस साल नवरात्रि का छठा दिन शुक्रवार को पड़ा है, जो परंपरा में देवी माँ और माँ लक्ष्मी की आराधना का दिन माना जाता है। कई लोग इस संयोग में आज देवी की पूजा को और ख़ास मानते हैं। ये अपनी श्रद्धा और परिवार की परंपरा पर निर्भर है। ✅ आज क्या करें सुबह जल्दी उठकर पूजा करें और घर को साफ़ रखें हरे रंग के वस्त्र या हरे पत्तों का प्रयोग करें कलश और जौ की देखभाल करें शहद का भोग लगाएँ और प्रसाद बाँटें व्रत रखें तो सात्विक भोजन लें अपने अंदर के डर पर थोड़ी देर शांत बैठकर विचार करें और मंत्र जपें ज़रूरतमंद को भोजन या वस्त्र दान करें ❌ आज क्या न करें क्रोध, कड़वे बोल और झगड़े से बचें तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें पूजा के दौरान मोबाइल और शोर से बचें कलश या जौ वाले पात्र को बार-बार न हिलाएँ किसी का अपमान या दिखावा न करें व्रत का भोजन झूठा या बर्बाद न करें ये बातें परंपरा पर आधारित हैं और परिवारों में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। 🔮 ज्योतिष की दृष्टि से माँ कात्यायनी कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में नवदुर्गा के हर रूप को किसी ग्रह से जोड़ा जाता है। प्रचलित मान्यता में माँ कात्यायनी को गुरु (बृहस्पति) ग्रह से जोड़ा जाता है, जो ज्ञान, विवाह और सौभाग्य का कारक है। इसी कारण विवाह की कामना वाली कन्याएँ आज के दिन उनकी पूजा करती हैं। कुछ योग परंपराओं में उनका संबंध आज्ञा चक्र से भी बताया जाता है। ये मान्यताएँ अलग-अलग परंपराओं में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। AstroStarTalk की सलाह यही है कि ग्रहों के नाम पर डरिए नहीं। विवाह जैसे बड़े निर्णय के लिए सिर्फ़ किसी उपाय पर निर्भर न रहें। अपनी कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी को दिखाइए, परिवार से बात कीजिए और महँगे उपायों के चक्कर में न पड़िए। नियम और श्रद्धा से की गई पूजा ही सबसे बड़ा उपाय है। 🌿 📖 हमारा पिछला लेख पढ़ें अगर आपने हमारा पिछला लेख नहीं पढ़ा है, तो यहाँ पढ़ सकते हैं: 👉 नवरात्रि दिन 4 💙: माँ कूष्मांडा की पूजा विधि, कथा, मंत्र और भोग | AstroStarTalk सीधा लिंक: https://astrostartalk.com/blogdetails.php?id=113 साथ ही AstroStarTalk पर घटस्थापना की विधि, नवरात्रि पूजा सामग्री की लिस्ट और माँ दुर्गा-महिषासुर की कथा भी देख सकते हैं। ❓ कुछ आम सवाल नवरात्रि का छठा दिन कब है? शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को। माँ कात्यायनी का भोग क्या है? परंपरा में शहद चढ़ाया जाता है। कई परिवार मौसमी फल भी अर्पित करते हैं। आज का रंग कौन सा है? हरा। पर रंग की परंपरा सबके लिए अनिवार्य नहीं है, अपनी सुविधा से अपनाएँ। क्या छठे दिन उपवास ज़रूरी है? नहीं। अपनी सेहत और परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय लें। डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था में कठोर व्रत न रखें और डॉक्टर की सलाह लें। क्या विवाह के लिए माँ कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए? परंपरा में ऐसी मान्यता है और कई कन्याएँ श्रद्धा से करती हैं। पर विवाह जैसे फ़ैसले में परिवार और अपनी समझ को सबसे ऊपर रखें। क्या बिना पंडित जी के पूजा हो सकती है? हाँ, कई परिवार खुद श्रद्धा से पूजा करते हैं। विधि में संदेह हो तो बड़ों या पंडित जी से पूछ लें। 🌺 अंत में माँ कात्यायनी हमें सिखाती हैं कि करुणा और साहस साथ-साथ चल सकते हैं। जब भी लगे कि अन्याय या डर आपको दबा रहा है, तो उनकी तलवार और अभय मुद्रा को याद कीजिए। आज की पूजा इसी भाव से कीजिए, और अपने भीतर की हिम्मत को एक बार फिर जगाइए। 🙏 AstroStarTalk की ओर से आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ कात्यायनी आपके घर में सुख, शांति और साहस लाएँ। ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए, और ज्योतिष से जुड़े सवाल हों तो AstroStarTalk पर हमसे ज़रूर पूछिए। 💫 आपको सबसे ज़्यादा हिम्मत कब मिलती है? कमेंट में हमारे साथ ज़रूर बाँटिए। 💚 नोट: तिथि, मुहूर्त और विधि क्षेत्र व परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं। अंतिम निर्णय से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित जी से सलाह लें। सर्वाधिकार सुरक्षित, AstroStarTalk।