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माँ स्कंदमाता 💛: नवरात्रि दिन 5 पूजा विधि, कथा, मंत्र | AstroStarTalk
माँ स्कंदमाता 💛: नवरात्रि दिन 5 पूजा विधि, कथा, मंत्र | AstroStarTalk
Posted on 14 October 2026 | by Astro Star Talk
नवरात्रि दिन 5 💛: माँ स्कंदमाता की पूजा विधि, कथा, मंत्र और भोग | AstroStarTalk
By AstroStarTalk | प्रकाशित: 15 अक्टूबर 2026 | विषय: नवरात्रि, माँ स्कंदमाता, पूजा विधि
AstroStarTalk की ओर से: शारदीय नवरात्रि के पाँचवें दिन की सरल और पूरी गाइड। 🪷
दुनिया में शायद कोई भी रिश्ता माँ और बच्चे के रिश्ते जितना सहज और गहरा नहीं होता। जब बच्चा गिरता है, तो पहला हाथ माँ का ही बढ़ता है। नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ दुर्गा के उसी ममता भरे रूप को समर्पित है, जो गोद में अपने पुत्र को लिए बैठी हैं।
आज नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ स्कंदमाता को समर्पित है। AstroStarTalk के इस लेख में हम उनका परिचय, कथा, पूजा विधि, मंत्र, भोग और कुछ ज़रूरी बातें आसान भाषा में जानेंगे। 🙏
📅 शारदीय नवरात्रि 2026 का पाँचवाँ दिन
- तारीख़: 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार
- तिथि: आश्विन शुक्ल पंचमी
- देवी: माँ स्कंदमाता
- आज का प्रचलित रंग: पीला 💛
- भोग: केला
दिल्ली के संदर्भ में पंचमी तिथि 15 अक्टूबर की रात लगभग 1:14 बजे शुरू होकर 16 अक्टूबर की सुबह लगभग 3:25 बजे तक रहती है, यानी पूरा आज का दिन इसमें आता है। तिथि और मुहूर्त का समय हर शहर में थोड़ा अलग होता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी की सलाह ले लें।
🪷 माँ स्कंदमाता कौन हैं
"स्कंद" भगवान कार्तिकेय का दूसरा नाम है, और "माता" यानी माँ। यानी स्कंद की माता। माँ स्कंदमाता वो रूप हैं जिसमें देवी पार्वती अपने पुत्र कार्तिकेय (स्कंद) को गोद में लिए हुए हैं।
उनका स्वरूप:
- चार भुजाएँ: ऊपर की दो भुजाओं में कमल के फूल
- एक भुजा में अपने पुत्र स्कंद को गोद में थामे हुए
- एक भुजा अभय मुद्रा में, जो भक्तों को निर्भय रहने का आशीर्वाद देती है
- वाहन सिंह (शेर), और कई चित्रों में वे कमल पर विराजमान हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है
- मुख पर ममता, शांति और तेज का मेल
माँ का ये रूप स्नेह, सुरक्षा और धैर्य का प्रतीक माना जाता है।
📖 माँ स्कंदमाता की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसने कठोर तप करके ब्रह्मा जी से वरदान पाया कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों हो सकती है। उस समय शिव जी गहरी तपस्या में लीन थे, और ऐसा लगता था कि उनका पुत्र होना मुश्किल है। इसी का फ़ायदा उठाकर तारकासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया।
तब देवी पार्वती ने शिव जी से विवाह किया, और उनके पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ। माँ पार्वती ने एक माँ के रूप में उनका पालन-पोषण किया और उन्हें शक्तिशाली बनाया। जब कार्तिकेय बड़े हुए, तो वे देवताओं की सेना के सेनापति बने और उन्होंने तारकासुर का वध किया।
इसी कथा के कारण पार्वती का वो रूप, जिसमें वे अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए हुए हैं, स्कंदमाता कहलाया। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में कथा के विवरण थोड़े भिन्न मिलते हैं, पर ममता और रक्षा का मूल भाव सब जगह एक ही है।
💡 इस कथा से क्या सीख मिलती है
- ममता में शक्ति है: माँ का प्रेम बच्चे को दुनिया का सामना करने की ताक़त देता है
- सही परवरिश: संतान को सही संस्कार और आत्मविश्वास देना ही असली शक्ति है
- धैर्य: हर समस्या का समाधान सही समय पर निकलता है
- सुरक्षा का भाव: परिवार की रक्षा और स्नेह साथ चलते हैं
इसीलिए जो माता-पिता अपनी संतान के सुखद भविष्य की प्रार्थना करते हैं, या परिवार में शांति और प्रेम चाहते हैं, उनके लिए आज का दिन ख़ास माना जाता है। 💛
🪔 माँ स्कंदमाता की पूजा विधि
ये एक सामान्य विधि है। हर परिवार की परंपरा अलग हो सकती है।
1. स्नान और शुद्धि 🚿
सुबह जल्दी स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें। आज पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
2. कलश और ज्योति की देखभाल 🏺
कलश और अखंड ज्योति (अगर जलाई है) की सफ़ाई और देखभाल करें। जौ में हल्का जल डालें और कलश के पास दीपक जलाएँ।
3. संकल्प और गणेश स्मरण 🙏
सबसे पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर आज की पूजा का संकल्प लें।
4. माँ का आवाहन 🌼
माँ स्कंदमाता का ध्यान करें और उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, पीले फूल और माला अर्पित करें। कमल का फूल भी उन्हें प्रिय माना जाता है।
5. भोग 🍌
परंपरा में माँ स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। कई परिवार पंचामृत, फल और पीली मिठाई भी चढ़ाते हैं।
6. मंत्र जाप 📿
नीचे दिए मंत्र शांत मन से 11, 21 या 108 बार जपें।
7. आरती और प्रसाद 🔔
अंत में माँ की आरती करें और प्रसाद सबमें बाँटें।
📿 माँ स्कंदमाता के मंत्र
मंत्र:
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
ध्यान मंत्र:
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
प्रार्थना मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अगर उच्चारण को लेकर संदेह हो, तो किसी जानकार या पंडित जी से एक बार सुन लें। पर श्रद्धा से "ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः" जपना भी पूरा माना जाता है। 🙏
💛 आज का रंग, फूल और भोग
- रंग: पीला, जो सकारात्मकता, खुशी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है
- फूल: पीले फूल और कमल
- भोग: केला, पंचामृत, फल और पीली मिठाई
एक प्रचलित मान्यता है कि केले का भोग लगाकर उसे परिवार में और बच्चों में बाँटने से सुख-शांति की कामना की जाती है। ये श्रद्धा की बात है, कोई निश्चित नियम नहीं। रंग पहनना भी आधुनिक परंपरा है, कोई शास्त्रीय नियम नहीं, इसलिए इसे अपनी सुविधा से अपनाइए। 🎨
🕉️ गुरुवार का संयोग
इस साल नवरात्रि का पाँचवाँ दिन गुरुवार को पड़ा है, जो परंपरा में भगवान विष्णु और बृहस्पति का दिन माना जाता है, और पीला रंग इस दिन से जुड़ा है। कई लोग इस संयोग में आज पीले वस्त्र और पीले फूल का प्रयोग ख़ास मानते हैं। ये अपनी श्रद्धा और परिवार की परंपरा पर निर्भर है।
✅ आज क्या करें
- सुबह जल्दी उठकर पूजा करें और घर को साफ़ रखें
- पीले रंग के वस्त्र या फूल का प्रयोग करें
- कलश और जौ की देखभाल करें
- अपनी माँ या घर की बुज़ुर्ग महिलाओं को प्रणाम करें और उनका हालचाल पूछें
- व्रत रखें तो सात्विक भोजन लें
- बच्चों को केले या फल बाँटें, ज़रूरतमंद बच्चों को भी दें
- संतान के लिए प्रार्थना करें और उनके साथ कुछ वक़्त बिताएँ
❌ आज क्या न करें
- क्रोध, कड़वे बोल और झगड़े से बचें
- तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें
- पूजा के दौरान मोबाइल और शोर से बचें
- कलश या जौ वाले पात्र को बार-बार न हिलाएँ
- बच्चों या घर की महिलाओं का अपमान न करें
- व्रत का भोजन झूठा या बर्बाद न करें
ये बातें परंपरा पर आधारित हैं और परिवारों में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।
🔮 ज्योतिष की दृष्टि से माँ स्कंदमाता
कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में नवदुर्गा के हर रूप को किसी ग्रह से जोड़ा जाता है। प्रचलित मान्यता में माँ स्कंदमाता को बुध ग्रह से जोड़ा जाता है, जो बुद्धि और संवाद का कारक है। कुछ परंपराओं में गुरुवार और पीले रंग के कारण उनका संबंध गुरु (बृहस्पति) से भी जोड़ा जाता है। कुछ योग परंपराओं में उनका संबंध विशुद्ध चक्र से भी बताया जाता है। ये मान्यताएँ अलग-अलग परंपराओं में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।
AstroStarTalk की सलाह यही है कि ग्रहों के नाम पर डरिए नहीं। अपनी कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी को दिखाइए और महँगे उपायों के चक्कर में न पड़िए। नियम और श्रद्धा से की गई पूजा ही सबसे बड़ा उपाय है। 🌿
📖 हमारा पिछला लेख पढ़ें
अगर आपने हमारा पिछला लेख नहीं पढ़ा है, तो यहाँ पढ़ सकते हैं:
👉 नवरात्रि दिन 4 💙: माँ कूष्मांडा की पूजा विधि, कथा, मंत्र और भोग | AstroStarTalk
सीधा लिंक: https://astrostartalk.com/blogdetails.php?id=113
साथ ही AstroStarTalk पर घटस्थापना की विधि, नवरात्रि पूजा सामग्री की लिस्ट और माँ दुर्गा-महिषासुर की कथा भी देख सकते हैं।
❓ कुछ आम सवाल
नवरात्रि का पाँचवाँ दिन कब है?
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को।
माँ स्कंदमाता का भोग क्या है?
परंपरा में केला चढ़ाया जाता है। कई परिवार पंचामृत, फल और पीली मिठाई भी चढ़ाते हैं।
आज का रंग कौन सा है?
पीला। पर रंग की परंपरा सबके लिए अनिवार्य नहीं है, अपनी सुविधा से अपनाएँ।
क्या पाँचवें दिन उपवास ज़रूरी है?
नहीं। अपनी सेहत और परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय लें। डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था में कठोर व्रत न रखें और डॉक्टर की सलाह लें।
क्या बिना पंडित जी के पूजा हो सकती है?
हाँ, कई परिवार खुद श्रद्धा से पूजा करते हैं। विधि में संदेह हो तो बड़ों या पंडित जी से पूछ लें।
🌺 अंत में
माँ स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि ममता सबसे बड़ी शक्ति है। जब भी जीवन में थकान या डर लगे, तो माँ की गोद और उनकी दुआओं को याद कीजिए। आज की पूजा इसी भाव से कीजिए, और अपने परिवार को थोड़ा और प्यार दीजिए। 🙏
AstroStarTalk की ओर से आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ स्कंदमाता आपके घर में सुख, शांति और ममता लाएँ। ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए, और ज्योतिष से जुड़े सवाल हों तो AstroStarTalk पर हमसे ज़रूर पूछिए। 💫
आपकी माँ की कौन सी बात आपको आज भी हिम्मत देती है? कमेंट में हमारे साथ ज़रूर बाँटिए। 💛
नोट: तिथि, मुहूर्त और विधि क्षेत्र व परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं। अंतिम निर्णय से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित जी से सलाह लें। सर्वाधिकार सुरक्षित, AstroStarTalk।