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माँ चंद्रघंटा ❤️: नवरात्रि दिन 3 पूजा विधि, कथा, मंत्र | AstroStarTalk
माँ चंद्रघंटा ❤️: नवरात्रि दिन 3 पूजा विधि, कथा, मंत्र | AstroStarTalk
Posted on 13 October 2026 | by Astro Star Talk
नवरात्रि दिन 3 ❤️: माँ चंद्रघंटा की पूजा विधि, कथा, मंत्र और भोग | AstroStarTalk
By AstroStarTalk | प्रकाशित: 13 अक्टूबर 2026 | विषय: नवरात्रि, माँ चंद्रघंटा, पूजा विधि
AstroStarTalk की ओर से: शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन की सरल और पूरी गाइड। 🔔
कभी-कभी जीवन में ऐसा पल आता है जब डर हमें घेर लेता है और समझ नहीं आता कि कहाँ से हिम्मत लाएँ। नवरात्रि का तीसरा दिन उसी हिम्मत को समर्पित है। आज माँ दुर्गा के उस रूप की आराधना होती है जिसके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, और जिनकी घंटी की ध्वनि को भय दूर करने वाली माना जाता है।
आज नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा को समर्पित है। AstroStarTalk के इस लेख में हम उनका परिचय, कथा, पूजा विधि, मंत्र, भोग और कुछ ज़रूरी बातें आसान भाषा में जानेंगे। 🙏
📅 शारदीय नवरात्रि 2026 का तीसरा दिन
- तारीख़: 13 अक्टूबर 2026, मंगलवार
- तिथि: आश्विन शुक्ल तृतीया
- देवी: माँ चंद्रघंटा
- आज का प्रचलित रंग: लाल ❤️
- भोग: दूध, खीर या दूध की मिठाई
दिल्ली के संदर्भ में तृतीया तिथि 12 अक्टूबर की रात लगभग 10:14 बजे शुरू होकर आज रात लगभग 11:27 से 11:29 बजे तक रहती है, और अभिजित मुहूर्त लगभग 11:44 से दोपहर 12:30 तक है। समय हर शहर में थोड़ा अलग होता है, इसलिए पूजा का समय तय करने के लिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी की सलाह ले लें।
🌙 माँ चंद्रघंटा कौन हैं
"चंद्र" यानी चंद्रमा और "घंटा" यानी घंटी। माँ के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसीलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
उनका स्वरूप:
- सुनहरी आभा वाला तेजस्वी रूप
- दस भुजाएँ, जिनमें त्रिशूल, गदा, तलवार, धनुष-बाण और कमंडल जैसे अस्त्र और कमल सुशोभित हैं
- वाहन सिंह (शेर)
- मुख पर शांति, पर आँखों में दृढ़ता और साहस
मान्यता है कि उनका रूप एक साथ करुणामयी और रक्षा करने वाला है। भक्तों के लिए वे शांति देती हैं, और बुराई के लिए उनका रूप उग्र माना जाता है।
📖 माँ चंद्रघंटा की कथा
एक प्रचलित कथा के अनुसार देवी पार्वती का विवाह भगवान शिव से तय हुआ। शिव जी अपनी बारात लेकर आए, जिसमें भूत-प्रेत, गण और तरह-तरह के विचित्र बाराती थे। उनका रूप देखकर माता मैना देवी भय से बेहोश हो गईं और सब घबरा गए।
तब माँ पार्वती ने स्थिति को सँभालने के लिए चंद्रघंटा का रूप धारण किया। शांत, पर तेजस्वी और रक्षक रूप देखकर सबका भय दूर हुआ, और विवाह की रस्में पूरी हुईं। इसी कारण इस रूप को विवाह के क्षण की पार्वती और साहस की देवी के रूप में पूजा जाता है।
एक और मान्यता में कहा जाता है कि असुरों से युद्ध में देवी ने अपनी घंटी की ध्वनि से ही शत्रुओं को भयभीत कर दिया था। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में कथा के विवरण थोड़े भिन्न मिलते हैं, पर साहस और रक्षा का मूल भाव सब जगह एक ही है।
💡 इस कथा से क्या सीख मिलती है
- शांत रहकर भी मज़बूत बनें: साहस का मतलब हमेशा गरजना नहीं होता
- संकट में धैर्य: घबराहट के समय सूझबूझ से स्थिति सँभाली जा सकती है
- रक्षा और करुणा साथ चलते हैं: शक्ति का सही इस्तेमाल दूसरों की सुरक्षा के लिए हो
- भय पर विजय: अंदर का डर ही सबसे बड़ा शत्रु है
इसीलिए जो लोग किसी बात से डरे हुए हैं, आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं, या मन की शांति चाहते हैं, उनके लिए आज का दिन ख़ास माना जाता है। 🌟
🪔 माँ चंद्रघंटा की पूजा विधि
ये एक सामान्य विधि है। हर परिवार की परंपरा अलग हो सकती है।
1. स्नान और शुद्धि 🚿
सुबह जल्दी स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें। आज लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
2. कलश और ज्योति की देखभाल 🏺
कलश और अखंड ज्योति (अगर जलाई है) की सफ़ाई और देखभाल करें। जौ में हल्का जल डालें और कलश के पास दीपक जलाएँ।
3. संकल्प और गणेश स्मरण 🙏
सबसे पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर आज की पूजा का संकल्प लें।
4. माँ का आवाहन 🌺
माँ चंद्रघंटा का ध्यान करें और उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, लाल फूल (जैसे गुड़हल) और माला अर्पित करें।
5. भोग 🥛
परंपरा में माँ चंद्रघंटा को दूध, खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है।
6. घंटी बजाएँ 🔔
आज की पूजा में घंटी बजाना ख़ास माना जाता है। माँ का नाम उनकी घंटी से जुड़ा है, इसलिए कई परिवार आरती और मंत्र जाप के समय घंटी का इस्तेमाल करते हैं।
7. मंत्र जाप 📿
नीचे दिए मंत्र शांत मन से 11, 21 या 108 बार जपें।
8. आरती और प्रसाद 🔔
अंत में माँ की आरती करें और प्रसाद सबमें बाँटें।
📿 माँ चंद्रघंटा के मंत्र
मंत्र:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः
ध्यान मंत्र:
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
प्रार्थना मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अगर उच्चारण को लेकर संदेह हो, तो किसी जानकार या पंडित जी से एक बार सुन लें। पर श्रद्धा से "ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः" जपना भी पूरा माना जाता है। 🙏
❤️ आज का रंग, फूल और भोग
- रंग: लाल (ऊर्जा, साहस और भक्ति का प्रतीक)
- फूल: लाल गुड़हल या अन्य लाल फूल
- भोग: दूध, खीर या दूध की मिठाई
मान्यता है कि दूध से बनी चीज़ें चढ़ाकर उन्हें गरीबों और बच्चों में बाँटने से घर में सुख और शांति की कामना की जाती है। ये श्रद्धा की बात है, कोई निश्चित नियम नहीं। नौ दिनों के रंग की परंपरा हर जगह एक जैसी नहीं होती, इसलिए इसे अपनी सुविधा से अपनाइए। 🎨
🕉️ मंगलवार का संयोग
इस साल नवरात्रि का तीसरा दिन मंगलवार को पड़ा है, जो परंपरा में हनुमान जी और मंगल ग्रह का दिन माना जाता है। कई लोग इस संयोग में आज साहस और शक्ति की आराधना को और ख़ास मानते हैं। ये अपनी श्रद्धा और परिवार की परंपरा पर निर्भर है।
✅ आज क्या करें
- सुबह जल्दी उठकर पूजा करें और घर को साफ़ रखें
- लाल वस्त्र या लाल फूल का प्रयोग करें
- कलश और जौ की देखभाल करें
- आरती के समय घंटी बजाएँ
- व्रत रखें तो सात्विक भोजन लें
- ज़रूरतमंद को दूध, फल या भोजन का दान करें
- मन में डर हो तो कुछ देर शांत बैठकर मंत्र जाप करें
❌ आज क्या न करें
- क्रोध, कड़वे बोल और झगड़े से बचें
- तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें
- पूजा के दौरान मोबाइल और शोर से बचें
- कलश या जौ वाले पात्र को बार-बार न हिलाएँ
- व्रत का भोजन झूठा या बर्बाद न करें
ये बातें परंपरा पर आधारित हैं और परिवारों में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।
🔮 ज्योतिष की दृष्टि से माँ चंद्रघंटा
कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में नवदुर्गा के हर रूप को किसी ग्रह से जोड़ा जाता है। प्रचलित मान्यता में माँ चंद्रघंटा को शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है, जो सौंदर्य, प्रेम और सुख-सुविधा का कारक है। कुछ योग परंपराओं में उनका संबंध मणिपुर चक्र से भी बताया जाता है, जो आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति का केंद्र माना जाता है। ये मान्यताएँ अलग-अलग परंपराओं में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।
AstroStarTalk की सलाह यही है कि ग्रहों के नाम पर डरिए नहीं। अपनी कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी को दिखाइए और महँगे उपायों के चक्कर में न पड़िए। नियम और श्रद्धा से की गई पूजा ही सबसे बड़ा उपाय है। 🌿
📖 हमारा पिछला लेख पढ़ें
अगर आपने हमारा पिछला लेख नहीं पढ़ा है, तो यहाँ पढ़ सकते हैं:
👉 नवरात्रि दिन 2 🤍: माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, कथा, मंत्र और भोग | AstroStarTalk
सीधा लिंक: https://astrostartalk.com/blogdetails.php?id=111
साथ ही AstroStarTalk पर घटस्थापना की विधि, नवरात्रि पूजा सामग्री की लिस्ट और माँ दुर्गा-महिषासुर की कथा भी देख सकते हैं।
❓ कुछ आम सवाल
नवरात्रि का तीसरा दिन कब है?
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को।
माँ चंद्रघंटा का भोग क्या है?
परंपरा में दूध, खीर या दूध से बनी मिठाई चढ़ाई जाती है।
आज का रंग कौन सा है?
लाल। पर रंग की परंपरा सबके लिए अनिवार्य नहीं है, अपनी सुविधा से अपनाएँ।
क्या तीसरे दिन उपवास ज़रूरी है?
नहीं। अपनी सेहत और परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय लें। डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था में कठोर व्रत न रखें और डॉक्टर की सलाह लें।
क्या बिना पंडित जी के पूजा हो सकती है?
हाँ, कई परिवार खुद श्रद्धा से पूजा करते हैं। विधि में संदेह हो तो बड़ों या पंडित जी से पूछ लें।
🌺 अंत में
माँ चंद्रघंटा हमें सिखाती हैं कि असली साहस शोर में नहीं, शांत मन की दृढ़ता में होता है। जब भी मन किसी बात से घबराए, उनकी घंटी की गूँज और मस्तक के चंद्र की शीतलता को याद कीजिए। आज की पूजा इसी भाव से कीजिए, और अपने भीतर के डर को एक कदम पीछे छोड़ दीजिए। 🙏
AstroStarTalk की ओर से आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ चंद्रघंटा आपके घर में सुख, शांति और साहस लाएँ। ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए, और ज्योतिष से जुड़े सवाल हों तो AstroStarTalk पर हमसे ज़रूर पूछिए। 💫
आपको किस बात से सबसे ज़्यादा हिम्मत मिलती है? कमेंट में हमारे साथ ज़रूर बाँटिए। ❤️
नोट: तिथि, मुहूर्त और विधि क्षेत्र व परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं। अंतिम निर्णय से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित जी से सलाह लें। सर्वाधिकार सुरक्षित, AstroStarTalk।